जय गोविन्द गूरू महाराज
जय आदिवासी
🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾
🌷 *राज, पाठ और ठाठ*🌷
🌾160 वीं गूरू गोविन्द जयन्ती के अवसर पर हमारे नव नियुक्त विधायक महोदय आदरणीय RP दादा का उद्बोधन में निम्न बिन्दुओं पर प्रकाश डाला!
🏹गूरू गोविन्द महाराज, सती सूरमाल महाराज और मावजी महाराज ने भीलो में जनजाग्रति के लिए आन्दोलन चलाया!
🏹इससे प्रेरित होकर बरसो से दबा कूछला भील समूदाय ने गूरू उपदेशो पर चलने प्रयास किया लेकिन शासक जातियों ने राज और ठाठ से भीलों को कोसो दूर रखा लेकिन
🏹गूरू उपदेशों से भक्ति मार्ग पर चलकर पाठ-पूजा करना शुरू किया जिससे आदिवासी देश दूनिया में प्रकृति पूजक के रूप में पहचाना गया!
जैसे - जमीन- आसमान, पाणी- पोवन, सूरज-चांद व तारे, अन्न- अग्नि, बारे मेघळा नी तीरे विजॉळ की पूजा करने वाला सिद्ध हूआ!
🏹 इस जन जाग्रति आन्दोलन को तत्कालीन शासक वर्ग ने 1913 की मानगढ हत्याकांड की घटना को अंजाम देकर आन्दोलन को दबाने का कुत्सित प्रयास किया!
🏹विधायक महोदय ने इस आन्दोलन में मारे गये 1500 भीलो को शहीदों की उपमा देकर उनके परिवार जनो की पहचान कर प्रत्येक परिवार को सरकारी नौकरी देने की मांग ऊठाई !
🏹तथा कांग्रेस को इस घटना के लिए माफी मांगनी को कहा क्योंकि कांग्रेस की उत्पत्ति 1885 में हो चूकी थी और उसने कभी इस घटना का विरोध नही किया!
🏹एकलव्य का अंगूठा काटा गया फिर भी आज तक दोनों पार्टीयो ने कभी ऐसी घटनाओं का विरोध तक नहीं जताया!
🏹जो गूरू गोविन्द के मार्गदर्शन पर जन जागरण करते हैं उनको आज नक्सलवाद का आरोप लगाकर आवाज़ दबाने का प्रयास करते हैं!
🏹 गूरू गोविन्द ने उस समय स्थानीय शासन व्यवस्था की मांग उठाई वही आज 5 वीं अनुसूची कहलाती है!
🏹गूरू गोविन्द की भविष्यवाणी पर संकेत कर मूस्कराने लगे !
🏹उन्होने छाणी -.मंगरी पर पहली धूणी गोडकर ध्वज लहराते हूए कहाँ कि आज से ऊँच नी नीच और नीच की ऊँच व्यवस्था कायम होगी!
🏹माडी मेल नी खाडा वाडा पासा मळहे!
🏹भणी गणी नी होशियार रीजू राज, पाठ नी ठाठ एक ना एक दाडो पासो मळहे!
🏹गूरू गोविन्द के अधूरे सपने राज, पाठ और ठाठ को पूरा करने लिए एक होने का आह्वान किया!
🏹आदिवासी की महानतम जीवन शैली पर फोकस डाला!
जय आदिवासी
आपकी जय
जय आदिवासी
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🌷 *राज, पाठ और ठाठ*🌷
🌾160 वीं गूरू गोविन्द जयन्ती के अवसर पर हमारे नव नियुक्त विधायक महोदय आदरणीय RP दादा का उद्बोधन में निम्न बिन्दुओं पर प्रकाश डाला!
🏹गूरू गोविन्द महाराज, सती सूरमाल महाराज और मावजी महाराज ने भीलो में जनजाग्रति के लिए आन्दोलन चलाया!
🏹इससे प्रेरित होकर बरसो से दबा कूछला भील समूदाय ने गूरू उपदेशो पर चलने प्रयास किया लेकिन शासक जातियों ने राज और ठाठ से भीलों को कोसो दूर रखा लेकिन
🏹गूरू उपदेशों से भक्ति मार्ग पर चलकर पाठ-पूजा करना शुरू किया जिससे आदिवासी देश दूनिया में प्रकृति पूजक के रूप में पहचाना गया!
जैसे - जमीन- आसमान, पाणी- पोवन, सूरज-चांद व तारे, अन्न- अग्नि, बारे मेघळा नी तीरे विजॉळ की पूजा करने वाला सिद्ध हूआ!
🏹 इस जन जाग्रति आन्दोलन को तत्कालीन शासक वर्ग ने 1913 की मानगढ हत्याकांड की घटना को अंजाम देकर आन्दोलन को दबाने का कुत्सित प्रयास किया!
🏹विधायक महोदय ने इस आन्दोलन में मारे गये 1500 भीलो को शहीदों की उपमा देकर उनके परिवार जनो की पहचान कर प्रत्येक परिवार को सरकारी नौकरी देने की मांग ऊठाई !
🏹तथा कांग्रेस को इस घटना के लिए माफी मांगनी को कहा क्योंकि कांग्रेस की उत्पत्ति 1885 में हो चूकी थी और उसने कभी इस घटना का विरोध नही किया!
🏹एकलव्य का अंगूठा काटा गया फिर भी आज तक दोनों पार्टीयो ने कभी ऐसी घटनाओं का विरोध तक नहीं जताया!
🏹जो गूरू गोविन्द के मार्गदर्शन पर जन जागरण करते हैं उनको आज नक्सलवाद का आरोप लगाकर आवाज़ दबाने का प्रयास करते हैं!
🏹 गूरू गोविन्द ने उस समय स्थानीय शासन व्यवस्था की मांग उठाई वही आज 5 वीं अनुसूची कहलाती है!
🏹गूरू गोविन्द की भविष्यवाणी पर संकेत कर मूस्कराने लगे !
🏹उन्होने छाणी -.मंगरी पर पहली धूणी गोडकर ध्वज लहराते हूए कहाँ कि आज से ऊँच नी नीच और नीच की ऊँच व्यवस्था कायम होगी!
🏹माडी मेल नी खाडा वाडा पासा मळहे!
🏹भणी गणी नी होशियार रीजू राज, पाठ नी ठाठ एक ना एक दाडो पासो मळहे!
🏹गूरू गोविन्द के अधूरे सपने राज, पाठ और ठाठ को पूरा करने लिए एक होने का आह्वान किया!
🏹आदिवासी की महानतम जीवन शैली पर फोकस डाला!
जय आदिवासी
आपकी जय