जब आदिवासी जाग उठेगा , तब वह बोलेगा " जय जोहार " मतलब प्रकृति की जय .....जो प्रकृति हवा , पानी के लिए किसी को भी जाती या धमॅ नहीं पूछती .... तो सालो से प्रकृति का जतन करने वाले आदिवासी या आदिम जाति को क्यों नष्ट करने के लिए तुले है लोग ... अपना स्वार्थ के लिए धमोॅ में बांटना ... नसबंदी के नाम पर आदिवासी औरतों की संख्या कम हो रही है ... जमीन , जंगल की जी जान से रक्षा करने वाले आदिवासियों को वहां से भगाने के लिए नक्सली कहेना और अत्याचार करके भगाकर जमीन उद्योगपतियों को देना ...आदिवासी ओ को खतम करने की साजिश कर रहे लोगों , सावधान ... आदिवासी जाग गया है .... कल का यह भोला भाला आदिवासी आज अपने हको , संविधान को जान चुका है .. आज आदिवासी लोगों को सिर्फ डोक्युमेंटरी फिल्मों में दिखाना .... कोई विदेशी आए तो आदिवासी संस्कृति को उनके सामने दिखाना ... चुनाव में तीरकमान के साथ फोटो खिंचावा के आदिवासी की स्वाथीॅ हेतु सर उपयोग करना ... यह सब जान चुके हैं ... कभी वनवासी कभी वनबंधु कहेकर हमारी असली पहचान मिटाने की कोशिश कर रहे लोग सुनो ... अब हम बेवकूफ नहीं रहे ......सालो से शिक्षा से वंचित कर दिया और अब संविधान में हक दिया तो आदिवासियों का अपमान कर उनकी हांसी उडाकर मानसिक रूप से कमजोर करके लघुताग्रंथि से पीडीत होकर सारी जिंदगी आरक्षण के बंधन में संकुचित हुआ आदिवासी अब जाग उठा है ....जिस राज्य की सरहद को बनाकर आदिवासी की बहुमत को कम कर दिया था वह आदिवासी आज बोडॅर लेस हो गया है और अब इस 9 अगस्त को सब विस्तार में एकजुट होकर विश्र्व आदिवासी दिन के दिन त्योहार जेसा माहौल बनाकर पूरे देश के आदिवासियों एक बडा त्योहार की तरह सेलिब्रेशन करके आने वाले कल में आदिवासी को व्यसन मुक्त और सामाजिक , आर्थिक सशक्त समाज बनाने के लिए शैक्षणिक क्रांति के लिए शपथ लेगा ।
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