Thursday, 14 December 2017



लोग कहते है आदिवासी जंगल और पहाड़ में भटक रहा है , 
गलती कर रहे हो ये बोलकर , यह हमारा जीवन है हम यहाँ पले बड़े है 
प्रकृति हमारा जीवन है , आकर देखो यहाँ कोई वर्ण व्यवस्था नहीं है 
यहाँ कोई जाती नहीं है , सब बराबर है स्त्री और पुरुष 
अक्सर आदिवासी को जंगल कहने वाले ये भूल जाते है की इस दुनिया की सारी सरकारे 
और उनको चलने वाली बड़ी बड़ी कंपनिया सब पूरी दुनिया में आदिवासियों के जंगल और पहाड़ो 
के पीछे क्यों पड़ी हुई है 
उनको पता है सारा खनिज , साडी खूबसूरती आदिवासियों के जल ,जमीन और जंगल में है 
दुनिया का असली अध्यात्म भी यही बसता है आदिवासियों के बीच जंगल में 
पढ़ लेना एक बार आदिवासी महादेव शिव के बारे में अध्यात्म वही से शुरू हुआ है 
वैसे अगर नहीं समझ में आया तो कोई बात नहीं हर किसे के बस का नहीं होता आदिवासियों को समझना 
Ek Adiwasi

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